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दर्द-ए-मोहब्बत - रौशन केशरी

आँखों में एक शोला सा जमा था, जिंदगी अँधेरे में गुम थी,
मैं चुप सा सोचता रहा, पतझड़ में भी क्यूँ ये जमीं नम थी

हमें हर बात का एहसास था, फिर भी एक उम्मीद जगा रखे थे,

खुद को धुप में तप कर, उसे छांव में बिठा रखें थे

उसके जूनून का जहर फैलेगा, हमें यकीं था एक दिन आएगा,

फिर भी हम, उनकी साँसों को सबनम में छुपाए बैठें हैं

ये प्यार के रिश्ते बड़े मुश्किल होते हैं, हम जानते हैं जां,

फिर भी ये रिश्ता, हम हर कदम निभाएं बैठें हैं

सोचा उनकी आँखों में आंसू ना उतरने देंगे,

आज खुद की आँखों में, आंसू पिरोये बैठें हैं

जिसे कोशिश कर रही हो तुम, ढूंढने की किसी और ज़माने में,

वो तुम्हारे दिल के किसी कोने में, अपना घर बनाये बैठें हैं

हमने अंजाम की परवाह करनी छोड़ दी है अब, किससे कहें,

बस अपने सारे दर्द को ख़ुशी के फूल दिखाए बैठें हैं

पता नहीं था, जो कसमें खायीं, उससे इतना दर्द होगा,

फिर भी उन कसमों को, हम अपने सिने से लगाये बैठें है

क्यूँ दिलाती हो एहसास की, मैं क्या हुआ करता था,

तुझसे दूर रहकर, तेरी यादों का हम महल बनाये बैठें हैं

अब ये वादे वफ़ा के हमसे ना लेना कभी,

वादों की चिता पर, हम खुद को जलाये बैठे हैं

जिन्दगी के जो पल है, उसे साथ जीने की उम्मीद दी थी तुमने,

उन पलों को आप तो अपने दिल-व्-दिमाग से गवाए बैठे हैं

जिन्दगी तो कभी देगी सहारा मुझे, ये आस है,

तेरे संग जिन्दगी बिताने की एक प्यास जगाये बैठें हैं

हम डरते हैं, की कहीं आप भूल ना जायें हमें,

इसीलिए हम वफ़ा की कई कसमें खाएं बैठें है

विश्वास शब्द है ऐसा, जिसमें विष का वास होता है,

विष को अमृत बनाकर, इसे दिल में दबाये बैठें हैं

ना जाने कब ख़त्म होगा ये भयानक तूफ़ान-ए-मंजर,

जो वक़्त ने कई सदियों से हमारे बिच फैलाये बैठें हैं

तुम नासमझ हो या सिर्फ दिखावा करती हो,

ये बात तो हम खुद से भी छुपाए बैठें हैं

बस इतना कहना है मेरी जां, मेरी इन्तहां मत लो,

मैं वो बंदा हूँ, जो खुद से खुदी को मिटाए बैठें हैं

तुम कहती थी हम मिले हैं, ऊपर वाले की मर्ज़ी से,

उसी के आशिर्वाद से, हम कई सपने सजाये बैठें हैं

अपने हर लफ्ज़ को कैसे करूँ, अलफ़ाज़ में बयाँ,

आपके नाम के अलावा सारे लफ्ज़ भुलाये बैठें हैं

सोचता हूँ, भूल जाऊं हर उस पल को जो दर्द देते हैं,

पर यही दर्द ही तो, दिल की दिए जलाये बैठे हैं

बुझा कर इस दिए को,आखिर कब तक चल सकूँगा मैं,

इसीलिए तेरे हर एहसास को अपनी धड़कन बनाये बैठें हैं

मैं आपसे बहूत प्यार करता हूँ, ये जान लीजिये अब,
इसलिए आपको खोने का डर अपनी साँसों से भी छुपाए बैठें हैं

आपके हर फैसले पे सिर्फ आपका हक होगा,
अब तो हम जिद्द की भी आदत गवाएं बैठें हैं

कल हम रहे ना रहे पर बस याद ये रखना,

जो वक़्त हम एक दुसरे के साथ गुजारे बैठें हैं

रौशन की आवाज आज उतरी है कविता बन कर,

इस कविता को हम आज सब से सुनाये बैठें है