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शौर्य - आशुतोष राणा

शौर्य क्या है...
थरथराती इस धरती को रौंदती, फौजियों के पलटन का शोर,
या, सहमें से आसमान को रौंदता हुआ, एक सलामी का शोर...

शौर्य क्या है...
हरी वर्दी पे चमचमाते हुए, चंद पीतल के सितारे,
या, सरहद का नाम देके, अनदेखी कुछ लकीरों की नुमाइश...

शौर्य क्या है...
दूर उड़ते परिंदों को गोलियों से भून देने का एहसास,
या, शोलों के बरसात से,
पल भर में एक शहर को शमशान बना देने का एहसास...

शौर्य...
बहती व्यास में, हौले से, गर्म खून का सुर्ख हो जाना,
या, अनजान किसी जन्नत की फ़िक्र में,
पल-पल दोजख में जलते जाना,

बारूदों से धुंधले आसमान में, शौर्य क्या है...
वादियों में गूंजते, किसी गाँव के मातम में, शौर्य क्या है...

शौर्य....
शायद एक हौसला, शायद एक हिम्मत,
हमारे बहूत अन्दर,
मजहब के बनाये तहरीरों को तोड़कर,
किसी का हाथ थाम लेने की हिम्मत,
गोलियों के बेतहाशा शोर को, अपनी ख़ामोशी से,
चुनौती दे पाने की हिम्मत,
मरती-मारती इस दुनिया में,
निहत्थे डटे रह पाने की हिम्मत,

शौर्य...
आने वाले कल के खातिर,
अपने हिस्से की कायनात को आज बचा लेने की हिम्मत...
शौर्य क्या है...