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हमसफ़र - रौशन केशरी

क्यूँ कहते हो, मेरे साथ कुछ बेहतर नहीं होता,
सच ये है की, जैसा चाहो वैसा नहीं होता,

कोई सह लेता है, कोई कह देता है,
क्यूंकि गम कभी, जिंदगी से बढ़कर नहीं होता।

अपनों ने ही सिखा दिया, आज हमें यहाँ,
ठोकर देने वाला हर, पत्थर नहीं होता।

क्यूँ जिन्दगी की मुश्किलों से हार बैठो हो,
इसके बिना कोई मंजिल, कोई सफ़र नहीं होता,

कोई तेरे साथ नहीं है, तो भी गम ना कर,
खुद से बढ़कर दुनियाँ में, कोई हमसफ़र नहीं होता ।