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बरसों बाद - रौशन केशरी

आयी है तेरी खबर, बरसों के बाद,
फिर आयी है तौबा-ए-शिकन बरसों के बाद

बरसों बाद तेरी याद ने, मुझको रुला दिया,

इक बीता हुआ लम्हा, फिर याद दिला दिया

आज बरसों बाद, फिर तुझसे, बिछड़ गया हूँ,

तेरा आशिक़ था कभी, अब दीवाना बन गया हूँ

आज फिर बरसों बाद, मेरा साया भी मुझसे उदास है,

धड़कन हुई उदास, दिल को भी कुछ एहसास है

आज बरसों बाद भी मुझसे तू भुलायी ना गयी,

उठायी बहूत बार शमा मैंने, पर तेरी यादों को जलायी ना गयी

आज बरसों बाद, अश्कों से पैमाना भर गया है,

वो सालों से बंद अफसाना, आज फिर से बिखर गया है

वो सालों पुराणी वीरानी, आज फिर दिल पे छायी है,

आज बरसों बाद, मुझे फिर तेरी याद आयी है

बरसों बाद आज, तेरा जिक्र खुद से किया है,

लिखा है एक शोज-व-शेर, और तुझको अपने करीब महसूस किया है

आज बरसों बाद, फिर कदम लड़खड़ा गए हैं मेरे,

आज बरसों बाद ये दिल, संभल के गिरा है

बरसों बाद आज तर्क-ए-एहसास की कसम टूट गयी,

आज बरसों बाद, फिर से ख़ुशी मुझसे रूठ गयी

बरसों बाद आज फिर, तन्हां सा खड़ा हूँ,

ऐसा लगता है, सब सुलग चूका है, ज़रा सा बचा हूँ

बरसों बाद आज फिर खिज़ा, मेहमान हुई है,

बरसों बाद आज फिर, जुल्म की शाम हुई है

आज बरसों बाद, मैं कज़ा से फिर टकरा गया,

जाने कहाँ से बरसों बाद, तेरा मुस्कुराना याद आ गया

बरसों बाद आज फिर, तहरीर जवान हुई है,

बेवफ़ाई और एक पे, फिर से मेहरबान हुई है

आज रोया हूँ तो सुकून सा मालूम पड़ता है,

बरसों बाद एक अजनबी आग से, फिर पहचान हुई है

बरसों बीत गए हैं, ना तू है, ना तेरा ख्याल है,

बरसों बाद भी मैं खड़ा हूँ वहीँ,
तेरा याद आ जाना, आखिर क्यूँ इक सवाल है