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दीदार - रौशन केशरी

तेरी हंसी में भरी है, चिड़ियों सा चह-चहाना,
तेरे आंसू जो उभरे, डूब जाए ये सारा जमाना,
तेरी नज़रों में दिखती है, मेरी चाहत का नजराना,
तेरा इक दीदार हो जाए, फिर खुदा से क्या फ़रमाना।

कोमल कोमल हाथों से, पिघला दो सारा अफ़साना,
अपनी साँसों की गर्मी से, जला दो चाहत का सामयाना,
होंटो को होंटो पे रख के, छलका दो सारा पयमाना,
तेरा एक दीदार हो जाए, फिर खुदा से क्या फ़रमाना।

नव-यौवन की अंगराइयों में, दिल कहता है डूब जाना,
अधर उमंगों के दामन में, टूट गए तो क्या पछताना,
रौशन की रोसनाई से, साथ कभी तू छोड़ ना जाना,
तेरा एक दीदार हो जाए, फिर खुदा से क्या फ़रमाना।