मैं तो झोंका हूँ - डॉ कुमार विश्वास

मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगा।
जागती रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊँगा।

हो के कदमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा।
ख़ाक में मिल के भी मैं खुश्बू बचा ले जाऊँगा।

कौन सी शै मुझको पहुँचाएगी तेरे शहर तक।
ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊँगा।

कोशिशें मुझको मिटाने की भले हों कामयाब।
मिटते-मिटते भी मैं मिटने का मजा ले जाऊँगा।

शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गये।
सब यह रह जायेंगी मैं साथ क्या ले जाऊँगा।