बिना तुझसे मिले - रौशन केशरी

क्यूँ पवन छोड़ा इधर के आगमन को, यह बता,
क्यूँ किया व्याकुल तूने इस चमन को, यह बता।

भू-गगन का कर रहा, कण-कण तेरी प्रतिक्षा,
कब करेगी वो निष्ठुर पूरा सपन को, यह बता।

पीर मन की आ गयी है आँखें भिंगों कर, गाल पर,
क्यूँ तूने नहीं सुखाया इस नयन को, यह बता।

तन हमारा ताप रहा, स्मृतियों की तपिश से,
क्या मिला तुझको बढ़ाकर इस तपन को, यह बता।

कैसे ये लंबा वक़्त गुज़रा है, बिना तुझसे मिले,
व्योम देगी और कितने इस पीर दिल को, यह बता।