कभी ना कभी, मेरी याद भी तो आयी होगी,
आँखें अगर रोयी नहीं, भर तो आयी होगी।
कभी तो महसूस किया होगा, मेरी तन्हाईयों को तुमने भी,
कभी तो मुझसे मिलने की आस, दिल में उभर आयी होगी।
सोचा तो होगा मुझे किसी पहर तुमने,
वो जिसे हमेशा गाता था मैं,
वो धुन कभी तो, तुमने भी गुनगुनाई होगी।
रात के साए में मेरी बाहों को,
कभी तो तुम्हारी बाहें तरसी होंगी।
कभी ना कभी मेरे उल्फत की,
बेखुदी तुमपे छायी होगी।
किसी रोज तो देखा होगा,
मेरे तोहफों को इक नज़र भरके तुमने,
किसी रोज़ तो उनमें, मेरी एक झलक पायी होगी।
आँखें अगर रोयी नहीं, भर तो आयी होगी।
कभी तो महसूस किया होगा, मेरी तन्हाईयों को तुमने भी,
कभी तो मुझसे मिलने की आस, दिल में उभर आयी होगी।
सोचा तो होगा मुझे किसी पहर तुमने,
वो जिसे हमेशा गाता था मैं,
वो धुन कभी तो, तुमने भी गुनगुनाई होगी।
रात के साए में मेरी बाहों को,
कभी तो तुम्हारी बाहें तरसी होंगी।
कभी ना कभी मेरे उल्फत की,
बेखुदी तुमपे छायी होगी।
किसी रोज तो देखा होगा,
मेरे तोहफों को इक नज़र भरके तुमने,
किसी रोज़ तो उनमें, मेरी एक झलक पायी होगी।