हमने प्यार में पाया तो क्या पाया,
कभी खुद रो दिए कभी उनको रुलाया।
हालत-ए-गम में बह गायें जो आँसू,
वो जिन्दगी में फिर कभी ना बहने पाया।
सज़ा मुझे मिली और सजा उन्हें भी,
ऐसा भी क्या इंसाफ़ में है सर झुकाया।
हिम्मत नहीं थी उसमें साथ मेरा देने की,
अब तलक ना जाने कैसे वो चल पाया।
कभी खुद रो दिए कभी उनको रुलाया।
हालत-ए-गम में बह गायें जो आँसू,
वो जिन्दगी में फिर कभी ना बहने पाया।
सज़ा मुझे मिली और सजा उन्हें भी,
ऐसा भी क्या इंसाफ़ में है सर झुकाया।
हिम्मत नहीं थी उसमें साथ मेरा देने की,
अब तलक ना जाने कैसे वो चल पाया।