ख़ामोशी - रौशन केशरी

सो जाऊं कुछ पल तुम्हारे सिने से लग-कर,
आज ना जाने ये दिल क्यूँ घबड़ा रहा है

कर रहा है ये चाँद सितारों से बातें,

और धडकनों को ना जाने क्यूँ बढ़ा रहा है

शायद समा जाना चाहता है तेरी बाहों में,

हर ख़ामोशी को अब ये मिटा देना चाह रहा है