किसी की जान जाने पे, यूँ हँसा नहीं करते,
हो दुश्मन हो या बेगाना, उसे रुसवा नहीं करते।
हो दुश्मन हो या बेगाना, उसे रुसवा नहीं करते।
हमारी बात है कुछ और ही, जी भर के हस लेना,
कोई पूछे तो कहना की, हम कभी शिकवा नहीं करते।।
कोई आँखों से पीता हो, तो यूँ बरसा नहीं करते,
हो जाहिल हो या दीवाना, अजी उलझा नहीं करते।
हमारी बात है कुछ और ही, जी भर के बरस लेना,
कोई पूछे तो कहना की, हम कभी तौबा नहीं करते।।