प्यार की कविता - रौशन केशरी

प्यार की कविता तुझे किस हक से सुनाऊ,
ख्वाबों में तू मेरे सजती नहीं है।

जिंदगी का रंग कहाँ से ढूंढ के लाऊ,

पर साँसों में तू मेरे बसती नहीं है

हर लम्हें को दिया तुमने एक अजीब एहसास,

पर दिल के उजालों में तू कभी ढलती नहीं है

सोचा था, तुझे दूँ मैं हर खुशियाँ,

पर तू मेरे खुशियों में हसती नहीं है

हर सख्स में ढूंढता हूँ तुम्हारी चाहत को,

पर तू उन चेहरों में मिलती नहीं है

मेरी चाहत को दोगी तुम एक अनछुई सी आरजू,

पर यह सपना दिल में कभी सजती नहीं है

अब लौट आओ मेरी बाहों के इन घेरों में,

तेरे बिन अब कोई पल मेरी कटती नहीं है