बीते दिन - रौशन केशरी

जब भी सोचता हूँ उसको तो, बीते दिन याद आ जाते हैं,
कलि सा कोमल दिल है उसका, धड़कन याद आ जाती है।

उसकी आँखें ओस की बूंदों जैसी, नटखट बातें करती है,

मुरझाया जो उसका चेहरा, बादल गरजा करती हैं

उसकी कज़ा में जाने के लिए, दिल व्याकुल सा करता है,

मरुभूमि की शोक धरा पे, अरिमा बिखेरा करता है

लुप्त-विलुप्त छाया उसकी, दिल में उभरा करती है,

अधर-बसेरा टूट चूका अब, नज़रें ढूँढा करती हैं