परछाईं - रौशन केशरी

अचल - नभ, अति - सुंदर, विचलित, गहराई से डरता हूँ,
रहता हूँ प्रतिपल तेरे सिने में, पर जुदाई से डरता हूँ
चुरा लेना चाहता हूँ तुझको तुझसे, पर रुसवाई से डरता हूँ,
सच तो मेरा ये है की, मैं खुद अपनी ही परछाई से डरता हूँ।

जीवन के त्व्रनिम मधुरता के परे, बेपरवाही से डरता हूँ,
तेरे घेरे में सैर करूँ बादलों के, पर ऊंचाई से डरता हूँ
वफ़ा की तू मिसाल है मेरे लिए, फिर भी बेवफाई से डरता हूँ,
सच तो मेरा ये है की, मैं खुद अपनी ही परछाई से डरता हूँ।