दर्द होगी दवा जिस किसी के लिए,
हो मुबारक बहूत बस उसी के लिए।
हमने पाया बहूत मौत के वास्ते,
हमने खोया बहूत जिन्दगी के लिए।
वो ना जाने कहाँ भीड़ में खो गयी,
हम तरसते रहे जिस ख़ुशी के लिए।
एक सागर हमें इस तरह का मिला,
रो रहा था जरा सी नदी के लिए।
जोर सम्बन्ध को, तोड़ प्रतिबन्ध को,
दोस्ती भी करी, दुश्मनी के लिए।
उस अँधेरे की औकात मत पूछिए,
जो लूटा उम्र भर रौशनी के लिए।
हमने कैसे कहाँ काट ली जिन्दगी,
ये सवालात है ख़ुदकुशी के लिए।
कोई धन की हिफाज़त में जगता मिला,
कोई सो ना सका इस कमी के लिए।
कोई रोता मिला, कोई सोता मिला,
लोग पागल मिले एक ख़ुशी के लिए।
हम बनाने लगे सोध-शालाओं में,
आदमी का जहर, आदमी के लिए।
छोड़ दी वो जमीं राम-अल्लाह ने,
लोग लड़ते रहें जिस जमीं के लिए।
हो मुबारक बहूत बस उसी के लिए।
हमने पाया बहूत मौत के वास्ते,
हमने खोया बहूत जिन्दगी के लिए।
वो ना जाने कहाँ भीड़ में खो गयी,
हम तरसते रहे जिस ख़ुशी के लिए।
एक सागर हमें इस तरह का मिला,
रो रहा था जरा सी नदी के लिए।
जोर सम्बन्ध को, तोड़ प्रतिबन्ध को,
दोस्ती भी करी, दुश्मनी के लिए।
उस अँधेरे की औकात मत पूछिए,
जो लूटा उम्र भर रौशनी के लिए।
हमने कैसे कहाँ काट ली जिन्दगी,
ये सवालात है ख़ुदकुशी के लिए।
कोई धन की हिफाज़त में जगता मिला,
कोई सो ना सका इस कमी के लिए।
कोई रोता मिला, कोई सोता मिला,
लोग पागल मिले एक ख़ुशी के लिए।
हम बनाने लगे सोध-शालाओं में,
आदमी का जहर, आदमी के लिए।
छोड़ दी वो जमीं राम-अल्लाह ने,
लोग लड़ते रहें जिस जमीं के लिए।